उज्जैन जिले में अर्ली किस्म की सोयाबीन खेतों से निकलने लगी है। जिला स्तरीय डायग्नोस्टिक दल के निरीक्षण और किसानों से बातचीत में इस बार औसतन 3 से 5 क्विंटल प्रति बीघा उत्पादन मिलने की जानकारी सामने आई है।
दल ने तराना और उज्जैन विकासखंड के कायथा, रामपुरा, जवासिया कुमार, पिपलिया, लक्ष्मीपुरा, लिमोदा और हरसौदन सहित आसपास के गांवों में फसल की स्थिति देखी। किसानों से उत्पादन और कटाई से जुड़ी समस्याओं के बारे में भी जानकारी ली गई।
दाना बिखरने से बचाने के लिए मजदूरों से कटाई की सलाह
कृषि अधिकारियों ने किसानों को जहां संभव हो, मजदूरों से सोयाबीन कटवाने की सलाह दी है। विभाग के अनुसार हार्वेस्टर से कटाई के दौरान दाने खेत में बिखर सकते हैं, जिससे उपज का नुकसान होने की आशंका रहती है।
हार्वेस्टर का उपयोग जरूरी होने पर स्ट्रॉ मैनेजमेंट सिस्टम यानी एसएमएस युक्त मशीन चुनने को कहा गया है। ऐसी मशीन सोयाबीन के भूसे को छोटे टुकड़ों में काटकर खेत में फैलाती है, जिससे मिट्टी में कार्बनिक पदार्थ बढ़ाने में मदद मिल सकती है।
रबी की फसल सिंचाई के उपलब्ध पानी को देखकर चुनें
कम वर्षा की स्थिति को देखते हुए दल ने आगामी रबी मौसम में गेहूं के साथ कम पानी वाली फसलों पर भी विचार करने को कहा है। विकल्प के रूप में चना, मसूर, सरसों और अलसी अपनाने की सलाह दी गई है।
किसानों से फसल चुनते समय उपलब्ध सिंचाई जल, कृषि संसाधनों और लागत का आकलन करने को कहा गया है। निरीक्षण उपसंचालक कृषि के.एस. कैन और कृषि विज्ञान केंद्र के वरिष्ठ कृषि वैज्ञानिक डॉ. ए.के. दीक्षित के मार्गदर्शन में हुआ, जिसमें सहायक संचालक कृषि कमलेश कुमार राठौर, विभागीय अधिकारी और स्थानीय किसान शामिल रहे।




