कटनी जिले के किसान समर्थन मूल्य पर धान बेचने के लिए 10 अक्टूबर तक पंजीयन करा सकते हैं। कलेक्टर आशीष तिवारी ने जिले में 51 पंजीयन केंद्र निर्धारित किए हैं, जो सभी कार्य दिवसों में खुलेंगे। रविवार और शासकीय अवकाश पर पंजीयन नहीं होगा।
पुराने और नए किसानों के लिए अलग विकल्प
पिछले वर्ष पंजीकृत किसान आधार नंबर, समग्र परिवार आईडी, मोबाइल नंबर, एग्रीस्टेक किसान आईडी या पुरानी पंजीयन आईडी से अपना विवरण प्राप्त कर सकेंगे। जरूरत होने पर नियमानुसार संशोधन किया जा सकेगा, जबकि नए किसानों को आवेदन में पूरा विवरण दर्ज कराना होगा।
आधार का बायोमैट्रिक या ओटीपी सत्यापन होने के बाद यूआईडीएआई के डाटाबेस में दर्ज जानकारी ई-उपार्जन पोर्टल पर आएगी। किसान के नाम और विवरण का मिलान होने पर ही पंजीयन सुरक्षित होगा तथा इसकी सूचना मोबाइल पर एसएमएस से मिलेगी।
एग्रीस्टेक से होगा भूमि और फसल का सत्यापन
पंजीयन में किसान के स्वामित्व वाले खसरा नंबर, रकबा और बोई गई फसल की जानकारी एग्रीस्टेक से ली जाएगी। यदि सभी खसरे वहां उपलब्ध नहीं हैं तो शेष खसरे पटवारी, सीएससी, ग्राम सहायक या फार्मर रजिस्ट्री एमपी मोबाइल ऐप के माध्यम से जुड़वाए जा सकेंगे।
जिन किसानों के पास आधार नंबर नहीं है, उन्हें आधार केंद्र पर आवेदन करना होगा। समग्र आईडी या आधार आवेदन की पावती और मोबाइल पर प्राप्त ओटीपी के आधार पर निर्धारित प्रक्रिया से उनका पंजीयन किया जा सकेगा।
सिकमी, बटाईदार और वन पट्टाधारियों के लिए व्यवस्था
सिकमी, बटाईदार और वन पट्टाधारी किसानों का पंजीयन सहकारी समितियों तथा सहकारी विपणन संस्थाओं के केंद्रों पर होगा। सिकमी या बटाईदार किसान को मूल भू-स्वामी और स्वयं के आधार नंबर, एग्रीस्टेक किसान आईडी तथा निर्धारित प्रारूप में अनुबंध की प्रति देनी होगी; एक से अधिक भू-स्वामियों की जमीन होने पर अलग-अलग अनुबंध और पंजीयन जरूरी होगा।
वनाधिकार पट्टा या सिकमी-बटाई अनुबंध 15 सितंबर 2026 से पहले निर्धारित प्रारूप में पंजीकृत होना आवश्यक है और सिकमी-बटाई अनुबंध की अधिकतम अवधि पांच वर्ष होगी। किसान अपने तहसील क्षेत्र के निर्धारित केंद्र पर दस्तावेज लेकर पंजीयन करा सकते हैं और बाद में पोर्टल से पंजीयन विवरण का प्रिंट भी प्राप्त कर सकेंगे।




