परंपरागत खेती में विविधीकरण और शासन की योजनाओं का लाभ लेकर कई किसान अपनी खेती को बेहतर कर रहे हैं। रीवा जिले के त्योंथर विकासखण्ड के ग्राम कलवारी के प्रगतिशील किसान रवीन्द्र पटेल ने प्राकृतिक खेती और श्रीअन्न मोटा अनाज की खेती को अपनाकर अपना भाग्य चमकाया है।
बलराम कृषि महोत्सव में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव को अपनी सफलता की कहानी सुनाते हुए श्री पटेल ने कहा कि मैं ग्राम कलवारी में जैव संसाधन केन्द्र चलाता हूँ। इसमें वर्मीकंपोस्ट तथा अन्य प्राकृतिक और जैविक खादों एवं कीटनाशकों का निर्माण किया जाता है। प्राकृतिक विधि को अपनाने से खेती की लागत 40 से 50 फीसदी तक घटी है।
पिछले तीन सालों से खेतों में रासायनिक खाद का उपयोग न करने से फसलों के उत्पादन में मामूली कमी आई है लेकिन उनकी गुणवत्ता में सुधार हुआ है। इसके साथ-साथ खेती की मिट्टी मुलायम हो गई है। कोदौ तथा अन्य मोटे अनाजों की खेती से हर साल लगभग एक लाख 50 हजार रुपए की आमदनी हो रही है।
सरकार की किसानों की आय को दुगना करने के संकल्प को पूरा करने के लिए अन्य किसानों को भी प्राकृतिक खेती का प्रशिक्षण दिया जा रहा है। किसान हितैषी योजनाओं के लिए मैं प्रधानमंत्री जी और मुख्यमंत्री जी के प्रति आभार व्यक्त करता हूँ।


