केंद्र सराकर एवं राज्य सरकार द्वारा महिलाओं को आत्मनिर्भर एवं सशक्त बनाने के लिए कई योजनाएं संचालित की जा रही है। इन योजनाओं से जुड़कर एवं लाभ पाकर महिलाएं सशक्त होकर सफलता की नई इबारत लिख रही है। शासन की यह योजनाएं महिलाओं के लिए वरदान साबित हो रही है। महिलाएं आजीविका मिशन से जुड़कर न केवल स्वयं सशक्त हो रही हैं बल्कि अपने परिवार का आर्थिक स्तर भी ऊंचा उठा रही है।

इन्हीं महिलाओं में टोंकखुर्द विकासखंड के ग्राम इकलेरा के स्व सहायता समूह की श्रीमती रेखा बैरागी है, जिन्होंने स्व सहायता समूह के माध्यम सब्जी व्यवसाय, पशुपालन एवं सिलाई कार्य को प्रारंभ किया और सफलता की नई इबारत लिखी। आज वे ग्रामीण महिलाओं के लिए आत्मनिर्भरता की एक जीती-जागती मिसाल बन चुकी है।

अपनी इस सफलता के लिए श्रीमती रेखा बैरागी प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी एवं मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव का हृदय से आभार व्यक्त कर रही हैं।

स्व सहायता समूह की श्रीमती रेखा बैरागी ने बताया कि वे राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के अंतर्गत जय महाकाल स्व सहायता समूह से जुड़ी हैं। उन्होंने बताया कि समूह से जुड़ने के पश्चात न सिर्फ अपनी किस्मत बदली, बल्कि आज वे तीन अलग-अलग व्यवसायों को एक साथ संभालकर कुल 2,00,000 रुपये की सालाना शुद्ध आय कमा रही हैं। श्रीमती बैरागी ने बताया कि लोन राशि का सटीक निवेश और सरकारी योजनाओं का बेहतरीन समन्वय करके अपनी इस कामयाब कहानी को लिखा है।

उन्होंने बताया कि ऋण का सही निवेश और व्यापार का विस्तार किया। उन्होंने समूह और बैंक से मिले ऋण को कर्ज नहीं, बल्कि प्रगति की पूंजी बनाया। उन्होंने अपनी सब्जी की दुकान को व्यवस्थित रूप से शुरू करने के लिए 1,00,000 रुपये का लोन लिया। उनका सब्जी व्यापार अच्छे से सुचारू रूप से चलने लगा। इस व्यवसाय से उन्हें सालाना करीब 70 हजार रुपए की आय हो रही है।

उन्होंने पशुपालन के लिए 1,00,000 रुपये का दूसरी बार ऋण लिया। इस ऋण डेयरी व्यवसाय का विस्तार करने के लिए उन्नत नस्ल के दुधारू पशु खरीदें। इस व्यवसाय से उन्हें सबसे अधिक आमदनी प्राप्त होती है। लोन की राशि से उन्होंने दुधारू पशु खरीदे और गाँव में दूध बिक्री का एक स्थायी काम स्थापित किया। इस व्यवसाय से उन्हें सालाना करीब 1 लाख रुपए से अधिक की आय हो रही है।

पशुओं को पर्याप्त पानी देने, सिलाई के समय को सुचारू रखने और सब्जी उत्पादन को बारह महीने चालू रखने के लिए उन्होंने बोरवेल करवाया, जिसने सभी गतिविधियों को सहारा दिया। इसके साथ ही उन्होंने सिलाई कार्य को प्रारंभ किया। घर बैठे अपने हुनर का बेहतरीन इस्तेमाल करते हुए वे कपड़े सिलने का कार्य भी करती हैं, जिससे उन्हें नियमित रूप से अतिरिक्त बचत होती है।

इस कार्य से उन्होंने सालाना करीब 30 हजार रुपए की आय हो रही है। कुल जमा सभी कार्यों को मिलाकर उन्हें सालाना 2 लाख रुपए की आय हो रही है।

श्रीमती रेखा बैरागी ने बताया कि उन्होंने अपने व्यवसाय को गति देने और बढ़ाने के लिए प्रधानमंत्री मुद्रा लोन किया है। शासन अपने व्यवसायों को और अधिक बढ़ाने तथा वर्किंग कैपिटल की जरूरतों को पूरा करने के लिए उन्होंने मुद्रा योजना का सफलतापूर्वक लाभ उठाया। इसके साथ ही उन्हें केंद्र एवं राज्य शासन की अन्य महत्ती योजनाओं का भी लाभ मिल रहा है।