आगर विकासखंड की ग्राम पंचायत सिंगलिया के किसान शिव सिंह ने खेत में उपलब्ध गोबर और फसल अवशेष से वर्मी कम्पोस्ट बनाना शुरू किया है। वे इस जैविक खाद का उपयोग मुख्य रूप से प्याज और लहसुन की फसलों में कर रहे हैं।

एक लाख की इकाई पर आधी राशि का अनुदान

उद्यानिकी विभाग की जैविक खेती योजना के तहत शिव सिंह को वर्मी बेड स्थायी ढांचा इकाई के लिए सहायता मिली है। एक लाख रुपये लागत वाली इस इकाई पर विभाग ने 50 हजार रुपये का अनुदान देने के साथ तकनीकी मार्गदर्शन भी उपलब्ध कराया।

उद्यानिकी अधिकारियों के मार्गदर्शन में गोबर, फसल अवशेष और दूसरी जैविक सामग्री से खाद तैयार की जा रही है। इस व्यवस्था से खेत में निकलने वाली सामग्री का उपयोग खाद बनाने में हो रहा है।

रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता हुई कम

वर्मी कम्पोस्ट के इस्तेमाल से शिव सिंह की रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता कम हुई है। विभागीय जानकारी के अनुसार इससे उत्पादन लागत में कमी आई है और मिट्टी की उर्वरता में सुधार हो रहा है।

शिव सिंह के मुताबिक विभाग की सहायता से जैविक खेती को बढ़ावा मिला और उनकी आय में सकारात्मक वृद्धि हुई है। उनका प्रयास क्षेत्र के दूसरे किसानों के लिए वर्मी कम्पोस्ट उत्पादन और जैविक खेती का स्थानीय उदाहरण बन रहा है।