उमरिया जिले के पाली विकासखंड के घुनघुटी क्षेत्र में खड़ा मिश्रा कृषि फार्म अब सिर्फ एक खेत नहीं, तीन सौ परिवारों की रोज़ी का ठिकाना है। यहाँ प्रगतिशील कृषक समर्थ मिश्रा लगभग 100 एकड़ क्षेत्र में सब्जी की खेती कर रहे हैं। खेत से निकलने वाली उपज जिले के बाज़ार तक ही सीमित नहीं रहती, वह रीवा, सतना, जबलपुर और पड़ोसी राज्य के बिलासपुर तक पहुँच रही है।

फार्म पर करेला, खीरा, लौकी, मिर्ची और टमाटर के साथ कई दूसरी सब्जियाँ उगाई जाती हैं। एक ही जगह पर कई फसलें होने से आपूर्ति साल भर बनी रहती है, और मंडी तक भेजने लायक मात्रा भी जुट जाती है। यही वजह है कि दूर के शहरों के व्यापारी भी यहाँ से माल उठा रहे हैं।

तीन सौ लोगों को सीधा काम

समर्थ मिश्रा के अनुसार उनके फार्म पर तीन सौ व्यक्तियों को रोजगार मिला हुआ है। इसके अलावा लगभग 200 लोग अप्रत्यक्ष रूप से इस काम से जुड़कर आजीविका चला रहे हैं — ढुलाई, पैकिंग और बिक्री जैसी कड़ियों में। ग्रामीण क्षेत्र में इतने लोगों को गाँव के भीतर ही काम मिलना पलायन रोकने की दिशा में मायने रखता है।

मिश्रा का कहना है कि सही तरीके से की जाए तो खेती को लाभ का धंधा बनाया जा सकता है। उनका यह दावा अनुभव पर आधारित है, किसी सरकारी आकलन पर नहीं — लेकिन जिले में उद्यानिकी की संभावनाओं की ओर वह जरूर इशारा करता है।

ड्रिप इरीगेशन और पॉलीहाउस

उन्होंने उद्यानिकी विभाग की ड्रिप इरीगेशन योजना का लाभ पाँच हेक्टेयर क्षेत्र में लिया है। बूँद-बूँद सिंचाई से पानी की खपत घटती है और सब्जी जैसी संवेदनशील फसल को जरूरत के मुताबिक नमी मिलती रहती है। बाकी रकबे में सिंचाई की क्या व्यवस्था है, इसका ब्यौरा जानकारी में नहीं दिया गया है।

फार्म पर पॉलीहाउस बनाकर उद्यानिकी फसलों और फूलों की खेती का काम भी चल रहा है। यह अभी प्रगति पर है, यानी पूरा नहीं हुआ है — इसलिए फूल उत्पादन के नतीजे आने में वक्त लगेगा। पॉलीहाउस में नियंत्रित माहौल मिलने से बेमौसम फसल और बेहतर गुणवत्ता की गुंजाइश बनती है।

जिले के किसानों से अपील

समर्थ मिश्रा ने जिले के किसानों से उद्यानिकी फसलों की ओर आगे आने की अपील की है। उनका कहना है कि उमरिया में इस क्षेत्र में असीम संभावनाएँ हैं और शासन की ओर से उद्यानिकी में कई योजनाएँ चलाई जा रही हैं, जिनका लाभ किसान ले सकते हैं।

जो किसान ड्रिप इरीगेशन, पॉलीहाउस या सब्जी-फूल की खेती से जुड़ी योजनाओं में रुचि रखते हैं, वे जिला उद्यानिकी विभाग के कार्यालय या अपने विकासखंड के उद्यान विस्तार अधिकारी से पात्रता और आवेदन की प्रक्रिया की जानकारी ले सकते हैं।