सेवा संकल्प अभियान 2026 के अंतर्गत कहानी सेवा की श्रृंखला में आज हम बात कर रहे हैं। बीना विकासखंड के ग्राम बेलई में किसान श्री विवेक दुबे की प्रेरणादायक कहानी जिन्होंने जैविक और प्राकृतिक खेती को अपनाकर अपनी आय में वृद्धि की। बीना विकासखंड के ग्राम बेलई में किसान श्री विवेक दुबे जैविक खेती और प्राकृतिक कृषि को बढ़ावा देने की दिशा में सराहनीय पहल कर रहे हैं।

उन्होंने लगभग डेढ़ एकड़ भूमि में वर्मी कम्पोस्ट यूनिट और जैविक खाद निर्माण इकाई स्थापित करने का कार्य प्रारंभ किया है। इस परियोजना का मुख्य उद्देश्य किसानों के लिए जैविक खाद और जैव उर्वरक तैयार करना है, ताकि किसानों की रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता कम हो।

श्री दुबे द्वारा भविष्य में जैविक डीएपी तैयार करने की दिशा में भी कार्य किया जा रहा है, जिसमें लगभग 10 प्रतिशत फास्फोरस की उपलब्धता का लक्ष्य रखा गया है। इस कार्य के लिए उन्होंने भोपाल से विशेष प्रशिक्षण प्राप्त किया है। उन्होंने अपने फार्म पर 100 से अधिक बेड तैयार किए हैं। प्रत्येक बेड से लगभग एक से डेढ़ टन जैविक खाद तैयार की जा सकेगी।

उनका लक्ष्य प्रतिदिन लगभग एक टन जैविक खाद का उत्पादन करना है। इस परियोजना को सफल बनाने में कृषि विज्ञान केंद्र (केवीके), सागर के वैज्ञानिक तथा जवाहरलाल नेहरू कृषि विश्वविद्यालय, जबलपुर का महत्वपूर्ण मार्गदर्शन प्राप्त हुआ है। इस जैविक खाद उत्पादन परियोजना में लगभग 40 से 50 लाख रुपये की लागत लगाई जा रही है।

बीना के वरिष्ठ कृषि विकास अधिकारी श्री अवधेश राय ने ग्राम बेलई स्थित फार्म का भ्रमण कर वर्मी कम्पोस्ट यूनिट का निरीक्षण किया। श्री राय ने बताया कि प्रगतिशील कियान श्री विवेक दुबे को कृषि विभाग द्वारा आवश्यक तकनीकी सहयोग प्रदान किया जा जा रहा है।

श्री विवेक दुबे की यह पहल दर्शाती है कि नई तकनीक और प्रशिक्षण से किसान न केवल आत्मनिर्भर बन सकते हैं, बल्कि पूरे क्षेत्र के लिए प्रेरणा स्रोत भी बन सकते हैं।