कभी परिवार की जरूरतों को पूरा करने के लिए कृषि और मजदूरी पर निर्भर रहने वाली डही विकासखंड के ग्राम बड़दा की श्रीमती उर्मिला परिहार आज अपनी मेहनत और हौसले से आत्मनिर्भरता की मिसाल बन गई हैं। योगमाया स्व-सहायता समूह से जुड़ने के बाद उन्होंने समूह से प्राप्त ऋण का सदुपयोग कर कई आजीविका गतिविधियां शुरू कीं। आज वे विभिन्न गतिविधियों से लगभग 22 हजार रुपये प्रतिमाह की आय अर्जित कर रही हैं और अपने परिवार की आर्थिक स्थिति को मजबूत बनाने के साथ ही गांव की अन्य महिलाओं के लिए भी प्रेरणा बन रही हैं।

कभी कृषि और मजदूरी पर थी परिवार की निर्भरता

श्रीमती उर्मिला परिहार पति श्री भगवान परिहार, कक्षा 8वीं तक शिक्षित हैं। समूह से जुड़ने से पहले परिवार की आय का मुख्य साधन कृषि था। उनके पति भी कृषि कार्य करते थे। कृषि से होने वाली सीमित आय से परिवार का वर्षभर भरण-पोषण करना चुनौतीपूर्ण था। आवश्यकता पड़ने पर परिवार को दूसरों के खेतों में मजदूरी भी करनी पड़ती थी। एक बेटा और दो बेटियों सहित परिवार की जिम्मेदारियों के बीच सीमित आय के कारण आर्थिक चुनौतियां बनी रहती थीं।

समूह ने दिया नई राह पर आगे बढ़ने का अवसर

मध्यप्रदेश राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन के मैदानी अमले ने श्रीमती उर्मिला को स्व-सहायता समूह की अवधारणा, नियमित बचत और समूह से मिलने वाले ऋण एवं अन्य अवसरों की जानकारी दी। बैठकों और प्रशिक्षणों के माध्यम से उन्हें समूह से जुड़ने के लिए प्रेरित किया गया। समूह से जुड़ने के बाद नियमित बचत, साप्ताहिक बैठकों और आंतरिक ऋण व्यवस्था ने उनके आत्मविश्वास को बढ़ाया। मिशन के मार्गदर्शन ने उन्हें अपनी मेहनत और हुनर को आय के साधन में बदलने का अवसर दिया।

एक नहीं, कई आजीविका गतिविधियों को बनाया आय का जरिया

श्रीमती उर्मिला ने समूह से ऋण लेकर अपनी आजीविका को विस्तार दिया। उन्होंने सब्जी की दुकान, छाछ विक्रय तथा हल्दी, मिर्च और धनिया की थोक खरीदी कर पैकेट पैकिंग एवं विक्रय का कार्य शुरू किया। वे प्रतिदिन लगभग 15 से 20 लीटर छाछ का विक्रय करती हैं। उनके व्यवसाय का दायरा ग्राम तक सीमित नहीं है, बल्कि कुक्षी विकासखंड क्षेत्र में भी उनकी गतिविधियां संचालित हो रही हैं।

इन कार्यों में उनके पति एवं बेटा भी सहयोग करते हैं।इसके साथ ही वे सिलाई कार्य, रुई की बत्ती निर्माण एवं विक्रय तथा डालर चना विक्रय जैसी गतिविधियां भी कर रही हैं। खेत एवं मां बगिया में पौधारोपण कर उन्होंने आजीविका के साथ पर्यावरण संरक्षण की दिशा में भी पहल की है।

आर्थिक मजबूती ने बदली परिवार की तस्वीर

लगातार मेहनत और विभिन्न आजीविका गतिविधियों से श्रीमती उर्मिला की आय में उल्लेखनीय वृद्धि हुई। वर्तमान में वे लगभग 22 हजार रुपये प्रतिमाह की आय अर्जित कर रही हैं। बढ़ी हुई आय ने परिवार के जीवन स्तर में भी सकारात्मक बदलाव किया है। कभी उनका घर आधा कच्चा और आधा पक्का था, लेकिन आर्थिक स्थिति मजबूत होने के बाद उन्होंने अपने घर को पूरी तरह पक्का करवाया।आज उर्मिला दीदी के लिए आत्मनिर्भरता केवल आय बढ़ने तक सीमित नहीं है। समूह से जुड़ने के बाद उनमें आत्मविश्वास बढ़ा है और वे परिवार की आर्थिक जिम्मेदारियों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने के साथ ही सामाजिक कार्यों में भी सक्रिय सहभागिता कर रही हैं।

खुद बदलीं, अब गांव की महिलाओं को बदलने की दे रहीं प्रेरणा

उर्मिला दीदी की सफलता का प्रभाव उनके परिवार तक ही सीमित नहीं रहा। वे अब गांव की अन्य महिलाओं को भी स्व-सहायता समूह से जुड़ने और आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनने के लिए प्रेरित कर रही हैं। उनके प्रयासों से ग्राम में 3 नए स्व-सहायता समूहों के गठन के लिए महिलाओं को प्रेरित किया गया है। वे समूह की महिलाओं को नियमित बचत, समय पर ऋण वापसी और आजीविका गतिविधियों के माध्यम से आय बढ़ाने के लिए लगातार प्रोत्साहित करती हैं।

उर्मिला दीदी की कहानी—मेहनत से आत्मनिर्भरता तक का सफर

श्रीमती उर्मिला परिहार की कहानी इस बात की प्रेरक मिसाल है कि जब मेहनत को समूह की शक्ति और सही मार्गदर्शन का साथ मिलता है, तो सीमित संसाधनों के बावजूद आत्मनिर्भरता की नई राह बनाई जा सकती है।

कृषि और मजदूरी पर निर्भर परिवार से आगे बढ़ते हुए आज उर्मिला दीदी कई आजीविका गतिविधियों का सफल संचालन कर रही हैं।उनकी सफलता यह संदेश देती है कि स्व-सहायता समूह केवल बचत और ऋण का माध्यम नहीं, बल्कि ग्रामीण महिलाओं के आत्मविश्वास, आर्थिक सशक्तिकरण और बेहतर भविष्य की मजबूत नींव भी है। इसके लिए प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी एवं मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव का आभार व्यक्त करती है।

आज उर्मिला दीदी स्वयं आत्मनिर्भर हैं और गांव की दूसरी महिलाओं को भी अपने पैरों पर खड़े होने के लिए प्रेरित कर रही हैं।